सदा इको रिस्तेदार

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सदा इको रिस्तेदार सदा इको रिस्तेदार

जेह्डा दयोत गुफा विच रहंदा

जेह्डा धोल्गीरी ते रहंदा

करदा सहनु प्यार

सदा इको रिस्तेदार सदा इको रिस्तेदार

जेह्डा साड़ियाँ झोलियाँ भरदा हर ईशा एह पुरिया है करदा

पल पल साड़ी खबर है रखदा बेड़े करदा पार

सदा इको रिस्तेदार सदा इको रिस्तेदार

एह्नु धुनें वाला भी कहंदे एह्नु पौना वाला भी कहंदे,

विच तलैयां डेरा इसदा सजेया है दरबार

सदा इको रिस्तेदार सदा इको रिस्तेदार

दिल जद करदा तुर पेंदे आ

होट एहदी तक लेनदे आ

पंकज पिंका भेटा गाउंदा लौंडा जय जय कार

सदा इको रिस्तेदार सदा इको रिस्तेदार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।