अब खत भी नहीं आते सदा भी नहीं आती

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॥ पावन पाठ ॥

अब खत भी नही आते,

सदा भी नही आती,,,,,,,,

क्या य़ाद मेरी उनको,

ज़रा भी नही आती

बिमार मुहाबत को,

गजा भी नही आती

कुछ काम बकीरों की

दुआ भी नही आती

शीशे की तरह तोड़ ही

देते हैं दिलों को

ये कैसा सितमगर है

द़या भी नही आती

क्यों होते हो बेचैन,

मेरे दिल को दुखा के,

क्या तुमको मनाने की

आधा भी नही आती

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।