सुन राधिका दुलारी मैं तेरे द्वार का भिखारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुन राधिका दुलारी में, हूँ द्वार का भिखारी,

तेरे श्याम का पुजारी, एक पीड़ा है हमारी ,

हमें श्याम न मिला ...

हम समझे थे कान्हा कही कुंजन में होगा,

अभी तो मिलन का हमने सुख नहीं भोगा

ओ सुनके प्रेम कि परिभाषा, मन में बंधी थी जो आशा,

आशा भई रे निराशा, झूटी दे गया दिलाशा

हमें श्याम न मिला...

देता है कन्हाई जिसे प्रेम कि दिशा,

सब विधि उसकी लेता भी है परीक्षा .....

ओ कभी निकट बुलाये, कभी दूरियाँ बढ़ाये,

कभी हषायें रुलाये छलिया हाथ नहीं आये

हमें श्याम ना मिला...

ओ अपना जिसे यहाँ कहे सब कोई, उसके लिए में दिन रात रोई,

ओ नेह दुनिया से तोडा, नाता संवारे से जोड़ा,

उसने ऐसा मुख मोड़ा हमें कही का ना छोड़ा

हमें श्याम ना मिला ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।