आंगन आँगन सुख बरसा

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॥ पावन पाठ ॥

बरसा दाता सुख बरसा

आंगन आँगन सुख बरसा

चुन चुन कांटे नफरत के प्यार अमन के फूल खिला,

कोई तन से है दुखी कोई मन से है दुखी,

हे प्रभु दया करो उल्जा जहान हो सुखी

सबके दुखो की तुम हो दवा आंगन आँगन सुख बरसा,

वैर द्वेष को मिटा तू सकल संसार से,

नाम का सिमरन करे हम तो सचे प्यार से

मानव से मानव हो न जुदा आंगन आँगन सुख बरसा,

है यही दुआ सदा कोई न उदास हो

दिल जो चाहे वो ख़ुशी सब के दिल के पास हो

मांगू हर दम सब का भला आंगन आँगन सुख बरसा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।