इको मेरी आस भुजायी वे बंसरी वालेया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इको मेरी आस भुजायी वे बंसरी वालेया

सेहरा मेरे लाल दा तू लायी वे बंसरी वालेया

शगना दा सेहरा बन बन्ना जदो जायेगा

सोहनी जेहिं बन्नो नु नाल लेके आयेगा

बनके बराती तू वी जाई वे बंसरी वालेया

इको..........

ऐना नु तू बन देवी प्रेम वाली डोर विच

प्रेम ऐवे होवे जीवे चन्न ते चकोर विच

प्रीत दोवे घरा दी वडाई वे बंसरी वालेया

इको.........

डोली लेके लाल जदो घर विच आयेगा

सारा परिवार मिलके शगन मनायेगा

महरा दा मीह बरसाई वे बंसरी वालेया

इको........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।