हर देश में तू हर भेष में तू तेरे नाम अनेक तू एक ही है

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॥ पावन पाठ ॥

हर देश में तू, हर भेष में तू,

तेरे नाम अनेक तू एक ही है,

तेरी रंग भूमि यह विश्व धरा,

सब खेल में, तू हर मेल तू,

हर देश में तू, हर भेष में तू ,

तेरे नाम अनेक तू एक ही है,

हर देश में तू,

सागर से उठा, बादल बनके,

बादल से गिरा जल हो करके,

फिर नहर बना, नदियाँ गहरी,

तेरे भिन्न प्रकार तू एक ही है,

हर देश में तू, हर भेष में तू,

तेरे नाम अनेक तू एक ही है,

हर देश में तू,

चोटी अणु परमाणु बना,

सब जीव जगत का रूप लिया,

कहीं पर्वत वृक्ष, विशाल बना,

सौन्दर्य तेरा सब ही है,

हर देश में तू, हर भेष में तू,

तेरे नाम अनेक तू एक ही है,

हर देश में तू,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।