आयी आयी दिवाली ल्याई खुशियां लिछमी माय

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आयी आयी दिवाली ल्याई खुशियां लिछमी माय

जगमग जगमग चमके दिवाला,

ओमायड़ जगमग जगमग ......

सरद पूनम न .... खीर बनावाँ ॥

चन्द्रमा की चांदनी श्यु इमरत पावा ॥

हो आसी.... लिछमी मैया जी होसी आनदउछाव ॥ जगमग

घर को हर कोनो चमकावां॥

धन तेरस धकनवन्तरी मनवां ॥

हो नयावस्त्र आभूषण मंगावा म्हारी माय ॥

जगमग जगमग चमके ..........

चौक पुरावा और रंगोली सज़ावा ॥

ऊँची अट्टारी जगमग दीप जगावां ॥

हो सारो जग उजियारो हो ज्यावे म्हारी माय ॥

जगमग जगमग चमके ........

राम राज्य ओज्यु आ जावे ॥

हर घर मं माँलिछमी आवे ॥

हो म्हे तो अन्नकूट भोग लगावा म्हारी माय ॥

जगमग जगमग चमके दिवला.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।