बंशी ऐसी बजायी मेरे श्याम ने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंशी ऐसी बजायी मेरे श्याम ने ,

प्यारी धुन को सुना तो मजा आ गया ....

अपनी सुध बुध भुलाके सभी गोपियां

सांवरे रंग समाई मजा आ गया

जादुगारी है बंशी की धुन श्याम की

सुन घटा गिर के छाई मजा आ गया !!

तीनों लोकों में धुन बंशी की छा गयी

देव नर नारी सब ऋषियों को भा गयी॥

यमुना का जल रुका , चाँद ठहर गया ॥

देख एसा नजारा , मजा आ गया !! बंशी ऐसी बजायी मेरे श्याम ने

हरे बांशो की बांसुरियां मन भा गयी

ढलती रात बजी दिल को तरसा गयी ॥

एसी लचक निराली मेरे श्याम की ॥

राधा हो गयी दीवानी , मजा आ गया !! बंशी ऐसी बजायी मेरे श्याम ने

वारी वारी मैं जाऊं तेरी बंशी पे

‘‘ लाल निरंजन ’’ बलिहारी तेरी बंशी पे॥

रोज सिमरण करूं तेरा ध्यान धरुं॥

दर्शन श्यामा का पाऊं , मजा आ गया ॥ बंशी ऐसी बजायी मेरे श्याम ने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।