मेरे साँवरे का प्यार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे साँवरे का प्यार सदा ,

मुझपर यूँ बरसता रहता है

बंद नैनो से, भी मुझको बस ,

दीदार इन्ही का होता है

जिस रोज़ से इनके दर आये,

हम दुख अपना सब भूल गए ,

भजनों में इनके हम यूँ खोये ,

कहीं आना जाना भूल गए,

अब हर पल ,मेरे ख़यालों में ,बस श्याम नाम ही रहता है

अब हर पल ,मेरे ख़यालों में, बस श्याम नाम ही रहता है

बंद नैनो से ,भी मुझको बस ,

दीदार इन्ही का होता है

मेरे साँवरे का प्यार सदा ,मुझपर युं बरसता रहता है

दुख की अब ये औकात नहीं ,

के छू भी हमको वो पाए ,

मायूसी अब ना जीवन में ,

बस हँसे ,हँसाये और गाएं,

इनकी कृपा से ना चिंता,ना कोई डर सताता है

बंद नैनों से ,भी मुझको बस ,

दीदार इन्हीं का होता है

मेरे साँवरे का प्यार सदा

मुझपर युं बरसता रहता है

बाबा की शीतल छाया में,

मै सारे ही सुख पाती हूँ,

कृष्णा तेरा हर पल शुक्र करूँ,

चरणो में शीश नवाती हूँ,

अब माया मोह नहीं कोई ,

धन श्याम नाम का बरसता है

अब माया मोह नहीं कोई

धन श्याम नाम का बरसता है

बंद नैनों से ,भी मुझको बस,

दीदार इन्ही का होता है

मेरे साँवरे का प्यार सदा ,

मुझपर युं बरसता रहता है

लिरिक्स: माया गोयल

सिंगर :कृष्णप्रिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।