लाज रख उचे पर्वत वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लाज रख उचे पर्वत वाली

उचे पर्वत वाली मैया विकत पहाड़न वाली,

लाज रख उचे पर्वत वाली

हरियल पीपल द्वार तिहारे मिया,

गेह रही अजब बहारी,

लाज रख उचे पर्वत वाली,

सोने को छत्र शीश पे सोहे मैया

कर में देर उधारी,

लाज रख उचे पर्वत वाली

धुप दीप ने वेद चडावे मैया ले कंचन की थाली

लाज रख उचे पर्वत वाली

बामन भेरो तेरे छप्पन कलुया,

लांगुर आगेया कारी

लाज रख उचे पर्वत वाली

चरनन तेरे शीश निभाये मैया,

बंशी धकम चारी,

लाज रख उचे पर्वत वाली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।