मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो सब तो छोटी बड़ा दर्द है भरेया

मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

सहनु पता तेरे कोलो टाइम नही माँ हालत लिखती जो मेरी ऐ,

मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

चिठ्ठी लिखदे होए दाती अखियाँ तो हंजू वगदे सी

तेनु की दसा दुनिया वाले अपना बन के मेनू ठाग दे सी

मैं हंजुआ दे नाल जिह्दा वरका भरेया

मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

हथ कभ दे सी मैया मेरी जिस वेले चिठ्ठी लिखदा सी

अख बंद करा जद भी मैं अपनी तेरा ही चेहरा दिसदा सी

जिहनू लिखदे होए मैं बहुत सी डरेया

मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

इतनी किरपा तू कर मैया मेरे जखमा ते बस लूँन

न धर मेरे दिल दे अरमान दा माँ तू शरेआम एवे खून न कर

जिहदा हर इक पासा मेरे खून न भरेया,

मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

बोती गल्ला नही लिखियाँ माँ बस दिल दा हाल सुनिया ऐ,

राहुल नु दुःख ने घेर लिया ओहने तेरा जय कारा लाया ऐ,

बस आर भी जिह्नु खत्म मैं करेया

मैया ओ चिठ्ठी मेरी है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।