आओ आओ गज़ानन

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जब जब, कीर्तन करने को हम, कहीं पे जाते हैं l

सब से पहले, जोर से गणपति, वंदन गाते हैं l

आओ आओ, गज़ानन हम, तुम्हें बुलाते हैं ll

तुम्हें बुलाते हैं, देवा तुम्हें मनाते हैं l

आओ आओ, गज़ानन हम, तुम्हें बुलाते हैं ll

ख़ज़राने से ll आओ गज़ानन, लड्डुवन भोग लगाते हैं l

पान सुपारी और नारियल, चरणों में चढ़ाते हैं ll

आओ आओ, गज़ानन तुमको, भोग लगाते हैं l

भोग लगाते हैं, देवा तुम्हें मनाते हैं l

आओ आओ, गज़ानन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

पार्वती के ll पुत्र गज़ानन, देवों में हो न्यारे रे l

शंकर जी के राज दुलारे, सबकी आंख के तारे रे ll

आओ आओ, गज़ानन तुमको, लाड लड़ाते हैं l

लाड लड़ाते हैं, देवा तुम्हें मनाते हैं l

आओ आओ, गज़ानन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बीच सभा में ll आओ गज़ानन, कीर्तन तुम्हे सुनाते हैं l

रामायण के दोहे पढ़कर, राम का अलख जगाते हैं ll

मंगल भवन, मंगल हारी,

द्रबहुस दशरथ, अजिर बिहारी l

कलियुग तरने, ना उपाए कोई,

राम भजन, रामायण दोही l

आओ आओ, गज़ानन राम, भजन सुनाते हैं l

*भजन सुनाते हैं, देवा तुम्हें मनाते हैं

आओ आओ, गज़ानन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।