देखले बनके तू साईं का मौज उडाएगा

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॥ पावन पाठ ॥

देखले बनके तू साईं का मौज उडाएगा,

तेरे नजदीक संकट न आएगा

देखले बनके तू साईं का मौज उडाएगा,

रोते चेहरों को ये हसाता है

फूल खुशियों के ये खिलाता है,

दाता ऐसा तू जग में न पायेगा

देखले बनके तू साईं का मौज उडाएगा,

मेरे साईं का प्यार ऐसा है,

माँ पिता करते हां जी वैसा है

उमर भर इनकी महिमा तू गाये गा,

देखले बनके तू साईं का मौज उडाएगा,

साईं के दर का है असर कुंदन,

बाँध लेता है प्रीत का बंधन,

मेरे बाबा का रंग चढ़ जाएगा ,

देखले बनके तू साईं का मौज उडाएगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।