॥ पावन पाठ ॥
गणपति राखो मेरी लाज
पूरण कीजियो मेरे काज
गणपति राखो मेरी लाज
सदा रहे खुशहाल गणपति लाल जो प्रथम में तुम्हे ध्यावे,
रिधि सीधी के दाता हो भाग्य विध्याता वो तुम से सब कुछ पाते,
गोरी लाला विनती सुन लो मेरी आज
गणपति राखो मेरी लाज
कभी न टूटे आस मेरा विश्वाश मैं आया शरण तिहारी,
हे शम्भु के लाल प्रभु किरपाल है तेरी महिमा न्यारी,
गोरी लाला सब देवो के तुम सरदार,
गणपति राखो मेरी लाज
जिस के सिर पे हाथ हो तेरा उसे नाथ फिर कैसा डर है,
जपते जो तेरा नाम सुबह और शाम तो उसका नाम अमर है
गोरी लाला तेरी दया का मई मोहताज
गणपति राखो मेरी लाज