भगवान् बदल के क्या होगा

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे को नदान बदल के क्या होगा

अगर श्रधा नही विस्वाश नही भगवान् बदल के क्या होगा

जब कण कण में वो व्यापत है क्यों ढूंढे उसे मंदिर मस्जिद,

अपने भीतर तू झाँक जरा बेठा है तेरे मन के अन्दर

तू राम का कर या रहीम का कर गुणगान बदल के क्या होगा

अगर श्रधा नही विस्वाश नही भगवान् बदल के क्या होगा

क्या होगा ज्योत जलाने से अगर मन में ढोर अँधेरा है,

तू लाख बदल चोले तन पे मन का दर्पण तेरा चेहरा है

कर देगा व्यान हकीत्कत ये पहचान बदल के क्या होगा

अगर श्रधा नही विस्वाश नही भगवान् बदल के क्या होगा

पोंछे न किसी के आंसू अगर दुखियो के दर्द बटाये न.

किसी घ्याल मन के झख्मो पर तूने मरहम अगर लगाये न

फिर दास भला तेरी पूजा का समान बदल के क्या होगा

अगर श्रधा नही विस्वाश नही भगवान् बदल के क्या होगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।