लगन लगी की करिये हून लगन लगी

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लगन लगी की करिये हून लगन लगी

ना जी सकिये न मारिये अब लगन लगी,

लगन लगी की करिये हून लगन लगी

तुम सुनो हमारे बेना मोहे रात दिने नही चैना,

हूँ पी बिन पलक न सरिये न जी सकिये न मरिये,

लगन लगी की करिये हून लगन लगी

पल्ले पई मुसीबत भारी कोई करो हमारी कारी,

एहो जे दुःख कैसे चरिये न जी सकिये न मरिये,

लगन लगी की करिये हून लगन लगी

है अगन की रोहदी जारी कोई हमरी प्रीत निवारी,

बिन दर्शन कैसे तरिये ना जी सकिये न मरिये,

लगन लगी की करिये हून लगन लगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।