मेरी गति मत बूझिये

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मेरी गति मत बूझिये काहू,

रघुवर पद रति हो जायेगी,

नेह-गेह प्रिय बन्धु मित्रवर ,

सबसे विरति फिर हो जायेगी,

सेवक एक भरोसा राखे,

संसारी जन मन की भाखे,

मिले जगत से उर ना राखे,

कभी किसी का दोष न झांके,

रघुवर कृपा मानि मन माहीं

कर दो दया प्रभु तर जाएग,

विषय व्याल पग-पग के बन्धन,

जग पूजे करता अभिनन्दन,

ताके कर लागे हरि चन्दन,

जाकी रति हो दशरथ नन्दन,

होत सुबुद्धि विमल उर अंतर

सहज चरण रति हो जायेगी,

हमें बचा लो मारुतिनन्दन

नित-नित तव चरणों में वन्दन,

छूटे मोह महा जग बन्धन,

गौरीश करे नित प्रभु वन्दन,

कृपा करो रघुवर से मिला दो

सायुज्य मुक्ति मिल जायेगी

गौरीश नन्दन पाण्डेय

शिक्षक :- आ.बि.इ.कालेज रेनुसागर, सोनभद्र।

मो० - ८७३८०६०८४३

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।