मैं तो वृन्दावन जाउंगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान खोल के बात मेरि सुन ले ओ पीया , मेरि सुन ले ओ पीया

मैं तो वृन्दावन जाउंगी, वृन्दावन जाउंगी, मैं वृन्दावन जाउंगी,

अडोसन भी जाए, पड़ोसन भी जाए

मैं कैसे रह जाऊं ओ पिया

मैं तो वृन्दावन जाउंगी

ललिता भी जाए वैशाखा भी जाए

मैं कैसे रह जाऊं ओ पिया

मैं तो वृन्दावन जाउंगी,

वृन्दावन जाउंगी, मैं वृन्दावन जाउंगी,

मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

ना चाहिए मेनू माथे दा टिक्का

चन्दन दा टिक्का मैं ला लुंगी

होली खेलूंगी, मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

ना चाहिए मेनू गले दा पेंडल

तुलसा दी माला मैं पा लुंगी

होली खेलूंगी, मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

ना चाहिए मेनू रेशम दी साड़ी

भगवा चोला मैं पा लुंगी

होली खेलूंगी, मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

ना चाहिए मेनू सोने दे कंगन

हाथो में वीणा मैं ले लुंगी

होली खेलूंगी, मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

ना चाहिए मेनू लड्डू पेड़े

रुखी सुखी खा के मैं रह लुंगी

होली खेलूंगी, मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

ना चाहिए मेनू महल चुबारे

जंगल च कुटिया मैं पा लुंगी

होली खेलूंगी, मैं तो उन संग होली खेलूंगी, मैं तो उन संग

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।