साईं नाम का दीवाना

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॥ पावन पाठ ॥

होश नहीं दुनिया का मुझको साई में रहूँ मगन

प्यार हुआ साई से मुझको साई मेरा भगवान

मैं तो दीवाना दीवाना साई नाम का दीवाना

मैं तो परवाना परवाना साई नाम का परवाना

शिर्डीवाले का दीवाना साई बाबा का दीवाना

अपने बाबा का दीवाना अपने बाबा का परवाना

तू ही मेरी आँखों में अब तू ही मेरे मन में

तुझे छोड़कर ना जाऊंगा और किसी महफिल में

श्रद्धा है तौरी ओ साई मेरी धड़कन में

एक तू ही बसा है साई मेरे इस तन मन में

बैठा हूँ ओ साई एक तुझसे आस लगाए

पूरे ही दर्शन की मन में ज्योत जगाये

भूल के दुःख अपना मैं तो साई साई सारे

जीऊंगा ओ साई अब तो तेरे ही सहारे

तेरे दर पे रहना है मुझे तेरे दर पे मरना है

जब तक है ये जान जिस्म में तेरी पूजा करना है

जीवन की नैया में मेरे खेवैया तुम हो

इस पापी के पाप धोने की नयी नदिया तुम हो

कोई कहे पगला दीवाना कोई कहे मतवाला

मुझको तो जपनी है अपने साई नाम की माला

मन में मेरे बसा है मेरा साई भोला भाला

मैंने तो पिया है अपने साई नाम का प्याला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।