साई बाबा करू वंदना मैं तेरी

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॥ पावन पाठ ॥

साई बाबा करू वंदना मैं तेरी

मुझको चरणों का सेवक बना लीजिये

दर बदर मैं भटकता रहा उमर भर

देनी है जो मुझे सजा दीजिये,

साई बाबा करू वंदना मैं तेरी

माया के जाल में मैं तो उल्जा रहा

तेरे दर पे आने से मैं मजबूर था,

मोह ने आँख पे ऐसा पर्दा किया

तेरे दर तेरी भगती से मैं दूर था

आ गया तेरा मुजरिम तेरे सामने

देने है जो मुझे वो सजा दीजिये

साई बाबा करू वंदना मैं तेरी

सावन बाधो सी अँखियाँ बरसती रही

तेरी राहो में पलके बिछाए खड़े

ऐसे संग दिन बनो न मेरे रेहमनुमा

हम उमीदो के चिराग जलाए खड़े

अपनी करनी पे गर्दन मेरी झुक गई

अब खताओ को मेरी रुला दीजिये,

साई बाबा करू वंदना मैं तेरी

तुम दयालु को दाता दया वान हो

सब के बिगड़े मुकदर जगाते हो तुम

जो भी शरदा सबुरी से दर आ गया

उसकी मुस्किल को आसान बनाते हो तुम

केवल सज दे में सिर को झुकाए खड़ा

अपना रहमो कर्म मुझपे कीजिये

साई बाबा करू वंदना मैं तेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।