जय अग्रसेन महाराज तेरी महिमा भारी

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॥ पावन पाठ ॥

जय अग्रसेन महाराज तेरी महिमा भारी

बजता डंका जग में पूजे दुनिया सारी

जय अग्रसेन महाराज................

महाभारत के रण में कन्हैया के साथ थे

सुना है गरीबों के तुम्ही दीनानाथ थे

तेरे वंश पे लक्मी का उपकार है भारी

जय अग्रसेन महाराज................

ईंट एक रूपया लेकर किया कल्याण था

सारे गुणों के धारी नहीं अभिमान था

सुर नर मुनि गण भी थे तेरे आभारी

जय अग्रसेन महाराज................

अग्रोहा में लगता जैसे आज भी बसेरा है

मिलता है सब कुछ दर से बना जो भी तेरा है

राजू पर भी भगवन करो नज़र तुम्हारी

जय अग्रसेन महाराज................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।