भजमन राम रे दीवाना

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भजमन राम रे दीवाना नही तेरे भ्रम का नही ठिकाना

भ्रम का नही ठिकाना रे झूठा है नेह लगाना

भजमन राम रे दीवाना नही तेरे भ्रम का नही ठिकाना

कौन तेरा है तू किस का धन योवन सब ना निशकारे,

छोड़ कमानी का चस्का रे यही है नरक निशाना

भजमन राम रे दीवाना नही तेरे भ्रम का नही ठिकाना

भाई बंधू पुत्र सनेही यम के दूत बनेगे यही,

जिसे कहे तू मेरा मेरा वो ही फुके तन तेरा

भजमन राम रे दीवाना नही तेरे भ्रम का नही ठिकाना

भाव सागर से तरना चाहे पी ले प्याला हरी रस का रे,

प्रेम मगन हो ये दास केहत है फिर नही आना जाना

भजमन राम रे दीवाना नही तेरे भ्रम का नही ठिकाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।