भेरू जी ना ना ना ना थारे बाजे गुंगरा

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॥ पावन पाठ ॥

भेरू जी ना ना ना ना थारे बाजे गुंगरा

थारे लागे रे लागे झालर की झंकार र र र.....

नखरालो खेले डूंगरा..

मतवालो खेले डूंगरा..

भैरू जी दूध तो पीओ नी दारु छोड़ दो ॥

थे तो छोड़ो रे छोड़ो कल्लाली को दे......श

नखरालो खेले डूंगरा

भैरू जी उबी रे कम्मारण देवे ओलमा ॥

ऐ म्हारा कलशा माइने कीदो नुकसा.....न

नखरालो खेले डूंगरा

भैरू जी उबी रे गुर्जर देवे ओलमा ॥

ऐ म्हारी जावणिया में कीदो नुकसा.....न

नखरालो खेले डूंगरा

भैरू जी उबी रे सुनारन देवे ओलमा ॥

ऐ म्हारी तलवार माइने कीदो नुकसा.....न

नखरालो खेले डूंगरा

भैरू जी उबी रे मालण की देवे ओलमा ॥

ऐ म्हारी बाड़ी माइने कीदो नुकसा.....न

नखरालो खेले डूंगरा

भैरू जी उबो रे बाल मंडल देवे ओलमा ॥

ऐ आज री भक्ति माइने काने थे आ......या

आजाओ एक बार तो.....

खनखा दो थाका गुंगरा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।