सत्य धर्म का नाश होरहा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सत्य धर्म का नाश हो रहा जार जार रोती है धरा

कलियुग का आतंक भयानक। आके मोहन देख जरा

कलीयुग में एक बार कन्हियाँ ग्वाल बन कर आओ रे,

आज पुकार करे तेरी गइयाँ आके कंठ लगाओ रे,

कलियुग में एकबार

जिनको मैंने दूध पिलाया वो ही मुझे सताते है,

चीयर फाड़ कर मेरे बेटे मेरा ही मॉस विकाते है,

अपनों के अभिशाप से मुझको आके आज बचाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हियाँ ग्वाल बन कर आओ रे

चाबुक से जब पीटी जाउ सेहन नहीं कर पाती मैं,

उबला पानी तन पर फेके हाय हाय चिलाती मैं,

बिना काल मैं तिल तिल मरती करुणा जरा दिखाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हियाँ ग्वाल बन कर आओ रे

काहे हम को मूक बनाया घुट घुट कर यु मरने को,

उस पर हाथ दिए न तूने अपनी रक्षा करने को,

भटक गई संतान हमारी रास्ता आके दिखाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हियाँ ग्वाल बन कर आओ रे

एक तरफ तो बछड़े मेरे अन धन को उपजाते है,

उसी अन्न को खाने वाले मेरा वध करवाते है,

हर्ष जरा तुम माँ के वध पे आके रोक लगाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हियाँ ग्वाल बन कर आओ रे

Hemkant jha प्यासा

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।