मुझे दर्शन दो दो बार हुए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तन मन में रवानी आ गई जब माँ तेरे दीदार हुए

इक बार कहा जय माता दी मुझे दर्शन दो दो बार हुए

तन मन में रवानी आ गई जब माँ तेरे दीदार हुए

इक बार नही दो बार नही

सो बार ये मैने देखा

हाथो हाथ बदल देती है तू किस्मत का लेखा

दो तेरे नाम पे खर्च किये दो दिन में दो के चार हुए

हर साल मुझे दो बार बुलाया,

किया काम ओ मैया इक माँगा था दे दिया तूने दो दो लाल ओ मैया

इक बार दया मांगी तेरी उपकार तेरे दो बार हुए

तन मन में रवानी आ गई जब माँ तेरे दीदार हुए

इक चोंकी की ईशा थी माँ

दो जगराते करवाए

इक थी मन्नत तूने दो दो नोराते करवाए

इक सपना था दो आँखे थी दो दो सपने सकार हुए

तन मन में रवानी आ गई जब माँ तेरे दीदार हुए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।