पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया माँ तेरे घर

सहारा तू है सहारा जब हमारा तो माता रानी कैसा डर,

उचे ये पहाड़ टेडी मेडी ये डगर

रोक नही पाई तेरे लाल का सफ़र

चुनी तेरी बाँध के जो कस ली कमर

चिंता रही कोई न रही कोई फिकर

माँ जुका तेरे द्वार के सिवा न कही सिर,

मैं होंसला न हारा ना रुका मैं थक कर

पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया माँ तेरे घर

रोकना तो चाहा था घटाओ ने मुझे

रास्ता दिखाया माँ हवाओं ने मुझे

बाँध सके बेडीया न छाले पाँव में

लिया दम आके मैंने माँ तेरे गाओ में

मेरी माँ दुआओं का तेरी है ये असर

कही होंसला न हारा ना रुका मैं थक कर

पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया माँ तेरे घर

मैया तेरा प्यार मुझे लेके आ गया

मेरा इतवार मुझे लेके आ गया

साया था मेरा तेरे साथ में

धुप में रुका न रुका बरसात में

दिन के उजाले मिले मुझे रात भर

कही होंसला न हारा ना रुका मैं थक कर

पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया माँ तेरे घर

देख तेरे समाने माँ लाल है तेरा

तेरा ही जवाब है सवाल है तेरा

मैया मेरी जीत नही जीत है तेरी

मेरे संग साथ सदा प्रीत है तेरी

कौन मुझे रोकेगा तू संग है अगर

कभी होंसला न हारा न रुका मैं थक कर

होंसला न हारा ना रुका मैं थक कर

पुकारा तूने पुकारा तेरा दुलारा दोडा आया माँ तेरे घर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।