इब दिल से बुलाई माँ आ गई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना तू नारियल चडाई ना चुंदरी ले आई,

इब दिल से बुलाई माँ आ गई

मैया की मैं रहमत का गुलाम हो गई

सब को बुला भवानी के संसार में खो गई

मेरी माँ को मेरी सादगी भा गई

इब दिल से बुलाई माँ आ गई

मनसा पूजा का फल क्या है संसार देख लिया

ये सूरज चंदा का परिवार देख लिया

मेरे दिल में वो अपनी लोह लगा गई

इब दिल से बुलाई माँ आ गई

दरबार माँ का मेरी हिरदये में बन गया

इक दीप ज्योत घी बाती के बिन ही जल गया

आनंद के छन में सदा समा गई

इब दिल से बुलाई माँ आ गई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।