जय हो गजानन्द राज तेरी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जय हो गजानन्द राज तेरी हो

विघ्न के हरता मंगल करता

पूर्ण करते काज जी

जय हो गजानन्द राज जी

गोरी नंदन है गणनायक

महिमा तेरी अपार है

तेरी छवि है सबसे न्यारी

लीला तेरी महान है

सबसे पहले सुमिरण तेरा

करते है गणराज जी

जय हो गजानन्द राज तेरी ,,,

मूसक पे तुम करते सवारी लगती प्यारी है

तीन लोक भी है गणनायक तुझ पे सब बलहारी है

ब्रह्मा विष्णु शिव शंकर भी तेरी करते जय जयकार जी

जय हो गजानन्द राज तेरी ,,,,,

शुभ और लाभ के देने वाले गजानन्द सरकार जी

तेरी दृस्टि जिस पर होगी ना होगी उसकी हार जी

हर ,राही, पर रखना यूही अपनी दया सरकार जी

जय हो गजानन्द राज तेरी,,,,,

,,,,,,,, ARUN CHAUHAN RAHI

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।