रोए रोए दशरथ कहे यूं पुकार के

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रोये रोये दशरथ कहे यू पुकार के

रामा रामा राम राम जाओ न छोड़ के

कैकई ने कैसा ये रिश्ता निभाया

अपने ही लोगो को किया है पराया

मेरे कलेजे जायो न मुँह मोड़ के

तेरा विरह प्यारे सह नही पयूंगा

बिन तुम्हारे राम जी नही पाऊंगा

तोड़ के वचन मेरा रहो तुम घर पे

मेरे गुरुवर क्यो न तुम समझाते

हक अपना रघुवर क्यो नही मांगते

हो जाये चाहे अयोध्या के टुकड़े

रानी कौशल्या अब तुम ही समझादो

देकर अपनी आन, सीने में छुपालो

नही तो रहोगी तूम विधवा बनके

राम है मर्यादा से बंधे हुए

कर्त्तव्य से अपने कभी न डिगे

जाते है वन को मान रखके

नीलम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।