छैल चतुर रंग रसिया रै भँवरा

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

छैल चतुर रंग रसिया रै भँवरा,

छैल चतुर रंग रसिया रै भँवरा,

पर घर प्रीत मत कीजै,

पराई नार आ नैण कटारी,

रूप देख मत रीझै,

रे भाई म्हांरा पर घर प्रीत मत कीजै,

घर के मंदरियाँ में निपट अँधेरों,

पर घर दीवालां मत जोईजे,

घर को गुड़ काळो ही खाईजे,

पर चोरी की खांड मत खाजे,

पर घर प्रीत मत कीजै,

रे भाई म्हांरा पर घर प्रीत मत कीजै,

पराया खेत में बीज मत बोईजे,

बीज अकारथ जावें,

कुळ ने दाग जगत बदनामी,

बुरा करम मत कीजे,

पर घर प्रीत मत कीजै,

रे भाई म्हांरा पर घर प्रीत मत कीजै,

भाइला री नार जामण जाई लागै,

बहिनड के बतलाजै,

कहत कबीर सुणो जी भाई साधु,

बैकुंठा पद पाइजै,

रे भाई म्हांरा पर घर प्रीत मत कीजै,

छैल चतुर रंग रसिया रे भवरा,

तू पर घर प्रीत मत कीजै,

पर घर प्रीत मत कीजै,

पराई नारी रा रूप कटारी,

रूप देख मत रीझे,

रे भाई म्हांरा पर घर प्रीत मत कीजै,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।