मंदिर में न मिलेंगे गुरूद्वारे न मिलेंगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर में ना मिलेंगे, गुरुदेव ना मिलेंगे॥

घर में ही है बेठे तेरे भगवान,

करले माँ को प्रणाम, अपने पिता को प्रणाम ,.

जिन्ह्नो ने तुमको जन्म दीया,उस माँ को कैसे भूल गया॥

पाल पोस कर बडा किया, उस पिटा को कैसे भूल गया,

इनके ही चरणों में है तेरा मक़ाम,

करले माँ को प्रणाम अपनी पिता को प्रणाम

ऊँगली पक्कड़ कर चलना सिखाया, भुख़े रह कर तुझे खियाला॥

कस्ट कभी जो अया तुमपर, हर पाल तेरा साथ निभाया,

इसे माँ बाप का ना करना अपमान,

करले माँ को प्रणाम अपनी पिता को प्रणाम

जनम से तेरा साथ दिया,अब तूने साथ क्यों छोड़ दिया॥

नही मांगते धन दोलत, वो चाहते है प्यार तेरा

इनके साथ मै जुरेगा तेरा नाम

मंदिर में ना मिलेंगे, गुरुदेव नाला मिलेंगे,

घर में हाई है बेहे है ते भगवान,

कार्ले माँ को प्रणाम, अपनी पिटा को प्रणाम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।