हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार,

बता ड्यून तन्ने राम नगरी,

हेली होज्या ये भजन की लार,

बता ड्यून तन्ने राम नगरी,

राम नगरी रै प्रेम नगरी,

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार,

बतां ड्यून तन्ने राम नगरी,

हेली म्हारीं हूँण सरवरिया री पाळ,

आता तो दिखै दोय जणा,

हेली म्हारी आगलो म्हारो ज्यामण जायो बीर,

पाछे तो म्हारों श्याम धणी,

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार,

बतां ड्यून तन्ने राम नगरी,

राम नगरी ये प्रेम नगरी,

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की ये लार,

बतां ड्यून तन्ने राम नगरी,

हेली म्हारी हूँण ये सावरिया री पाळ,

आम्बो छह एक आवली,

हेली म्हारों आम्बो फलह छबारम्बार,

आवली जाणे कैसी ये घड़ी,

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार,

बतां ड्यून तन्ने राम नगरी,

हेली म्हारी हूँण ये सावरिया री पाळ,

बैठे तो एक नांव खड़ी,

हेली म्हारी धर्मी धर्मी उतरया परली पार,

पापिया की जल में डूब पड़ी,

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार,

बतां ड्यून तन्ने राम नगरी,

हेली म्हारी भजन होवे ये बारम्बार,

सत्संग होवे एक घडी,

हेली म्हारी कह गया, कह गया दास कबीर,

बैरागण हरी के नाम पर खड़ी,

हेली म्हारीं होज्या ये भजन की लार,

बतां ड्यून तन्ने राम नगरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।