भजन बिना कोई न जागै रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भजन बिना कोई न जागै रे, लगन बिना कोई न जागै रै

तेरा जनम जनम का पाप करेड़ा, रंग किस बिध लागे रै,

संता की संगत करी कोनी भँवरा, भरम कैयाँ भागै रै

राम नाम की सार कोनी जाणै, बाताँ मे आगै रै,

या संसार काल वाली गीन्डी,टोरा लागे रै,

गुरु गम चोट सही कोनी जावै, पगाँ ने लागे रै,

सत सुमिरण का सैल बणाले, संता सागे रै,

नार सुषमणा राड़ लडै जद, जमड़ा भागै रै,

नाथ गुलाब सत संगत करले, संता सागे रै,

भानीनाथ अरज कर गावै, सतगुराँजी के आगै रै,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।