चल हंसा उस देश समद जहा मोती

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॥ पावन पाठ ॥

चल हंसा उस देश समद जहा मोती रे

मोती समद जहा मोती समद जहा मोती रे

चल हंसा उस देश निराला, बिन शशि भान रहे उजियारा

जहा लागे ना चोट काल की, जगामग ज्योति रे

चल हंसा उस देश समद जहा मोती रे

जब चलने की करी तैयारी, माया जाल फंस्या अतिभारी

करले सोच विचार घड़ी दोय, होती रे

चल हंसा उस देश समद जहा मोती रे

चाल पड्या जद दुविधा छूटी, पिछली प्रीत कुटुंब से टूटी

हंसा भरी उड़ान, हंसिनी रोती रे

चल हंसा उस देश समद जहा मोती रे

जाय किया समदर में बासा, फेर नहीं आवण की आशा

गावै भानीनाथ, मोत सिर सोती रे

चल हंसा उस देश समद जहा मोती रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।