सासरी मैं न जाऊ मेरी माँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सासरी मैं न जाऊ मेरी माँ मेरो मन लाग्यो राम के भजन में

राम के भजन में राम के भजन में

सासरी मैं न जाऊ मेरी माँ

ना भाये मोहे हरी हरी चूड़ी ना भाये मोहे कंगना

बोल दे माँ तू पिया से जाके जाऊ न मैं संग न

बिलकुल साच बताऊ मेरी माँ

मेरो मन लाग्यो राम के भजन में

नैनो में है छवि राम की मन में श्याम समायो

मिथ्या है संसार सभी ये मोहे रास न आयो

कैसे अब समजाऊ मेरी माँ

मेरो मन लाग्यो राम के भजन में

न रश्मी को आज बिसरियां बातो में उल्जावे

रंग चडा जिस पर भगती का कोई रंग न भावे,

और न अब खरमाऊ मेरी मेरो मन लाग्यो राम के भजन में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।