यमुना जल में ऐसे नहाती हो क्यों

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

यमुना जल में तुम ऐसे नहाती हो क्यों,

ना लजाती हो क्यों,

इस तरह से नहाना तुम को नही चाहिए,

यमुना जल में तुम ऐसे नहाती हो क्यों,

यमुना जल में रहो तुम सभी यु खड़ी,

चीर दूंगा तुम्हारी नही गोपियों

चीर लेने को बाहर न आती हो क्यों

अब लजाती हो क्यों

इस तरह से नहाना तुम को नही चाहिए,

कान्हा पनघट पे चुपके से आते हो क्यों

तुम्हे छुप के यु आना नही चाहिए

जब नहाती हु सखियों के संग नीर में

चीर आके हमारे चुराते हो क्यों

चोरी चोरी याहा ना आया करो

सुन लो कान्हा न हम को सताया करो

यमुना जल में तुम ऐसे नहाती हो क्यों,

क्रोध इतना दिखाना नही चाहिए

ना नाहोगे अब यु बिना वस्त्र के

लो कसम यमुना की अब वादा करो

लो कसम खा के कहती हु संवारे

इस तरह अब कभी न न्हायेगे हम

यमुना जल में तुम ऐसे नहाती हो क्यों,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।