गोरा झुला झूल रही भोले नाथ संग

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सावन की बरसे रिमझिम बुहार पेड़ो पे झूलो की लगी कतार,

गोरा झुला झूल रही भोले नाथ संग

को हो कुहकती है कोयल पीहू पीहू पपीहा पुकारे,

भोले दानी के दर्शन करने भगत हजारो पधारे,

झूलन की रुत आई

गोरा झुला झुल रही भोले नाथ संग,

भोले बाबा के डमरू पे नंदी गणपत भी झूम रहे है,

बादलो को भी देखो इन पर कैसे मोती बरसा रहे है

पवन चले पुरवाई

गोरा झुला झूल रही भोले नाथ संग

देवता भी संग में आज हो कर मगन नाचते है,

हाथ जोड़ इनसे आशीर्वाद सब मांग ते है

महिमा ये लगाई जाए

गोरा झुला झूल रही भोले नाथ संग

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।