श्री मति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन जैन भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।

यह हो महा व्रत पाले है, तुमने इसको पाला है ॥

हे माता, तेरी महिमा, माँ में स्वर्ग समाया है ॥

श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।

माँ श्रीमती है बड़भागी, आज यह किस्मत जागी ॥

मुनियो के नाथ जन्मे हैं, मनुवा हुआ बैरागी ।

शरत पूर्णिमा का चंदा, व्रातलगा में आया है॥,

हे माता, तेरी महिमा, माँ में स्वर्ग समाया है ।

श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।

श्री मति माँ के अंगना मैं ठुमक रहा चलत है लाला॥

पिता मालपा सबसे कहे देखो ये बाल निराला।

पूर्व जनम क पुनैये है जे तब ऐसा सुख पाया है॥

हे माता, तेरी महिमा, माँ में स्वर्ग समाया है ।

श्रीमति माँ तेरा लाला कितना भोला भाला है ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।