मैं मजनू दीवाना हु पागल हु तेरा

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॥ पावन पाठ ॥

मैं मजनू दीवाना हु पागल हु तेरा

मेरे साईं मेरी तू तडपन मिटा दे,

सवर जाएगा साईं जीवन ये मेरा,

मुझे साईं शिडी का रस्ता दिखा दे,

सैटरंगी दुनिया से मुझको क्या लेना रंग प्यार का साईं अपना चड़ा दे,

हर इक रंग में मुझको आये नजर तू

मेरे साईं नजरो को ऐसा बनादे,

मैं मजनू दीवाना हु पागल हु तेरा

फटा हाल मेरा है है पैरो में छाले,

मैं चल चल के गिरता तू ही सम्बाले,

कही मर न जाऊ आकार बचा ले

मुझे साईं अपने गले लगा ले

मैं मजनू दीवाना हु पागल हु तेरा

नजरे कर्म जिसमे तेरी न होती नही भीन सकता वो खुशियों के मोती,

जो जपता है माला जलाता है ज्योति,

साईं दर से उसको मिले हीरे मोती

मैं मजनू दीवाना हु पागल हु तेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।