नचलो दीवानों साईं के दर पे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नाचलो नाचलो नाचलो

शिर्डी के मदारी ने नचाया सारी दुनिया को

शंकर अवतारी ने नचाया सारी दुनिया को

नचलो दीवानों साईं के दर पे

आओ नचलो आओ नचलो,

नचलो दीवानों साईं के दर पे

सब से बात अलग है साईं की करतब जो दिखलाए साईं ने,

चाहे पंडित हो या मोलवी भेद समज न पाए,

इश्वर के पुजारी ने नचाया सारी दुनिया को

भीख मांगता घर घर जाके ये भोला भंडारी

सुख के मोती है झोली में फिर भी बना भिखारी

इस पालनहारी नचाया सारी दुनिया को

नचलो दीवानों साईं के दर पे

नीम के नीचे बैठा है पड़े पाओ में छाले,

जो भी दुखियां शरण में आता उसको गले लगा ले साईं जी

इस संकट हारी ने नचाया सारी दुनिया को

नचलो दीवानों साईं के दर पे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।