अटक्योड़ा कारज सारो जी गौरी पुत्र गणेश

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

अटक्योड़ा कारज सारो जी, गौरी पुत्र गणेश

गौरी पुत्र गणेश गजानंद, गौरी पुत्र गणेश

अटक्योड़ा कारज सारो जी, गौरी पुत्र गणेश

माँ पारवती का प्यारा, शिव शंकर लाल दुलारा

म्हारी नैया पड़ी मझधारा, ल्यावो शुभ सन्देश

ल्यावो शुभ सन्देश गजानंद, ल्यावो शुभ सन्देश

अटक्योड़ा कारज सारो जी, गौरी पुत्र गणेश

थे ऊँचे आसान बैठो, भक्ता से कदे ना रूठो

थारे मूसे की असवारि, थाने ध्यावे भगवा भेष

ध्यावे भगवा भेष गजानंद, ध्यावे भगवा भेष

अटक्योड़ा कारज सारो जी, गौरी पुत्र गणेश

थाने दास मोतीसिंह गावे, चरना मे शीश झुकावे

म्हारी नैया करो भव पारा जी, गौरी पुत्र गणेश

गौरी पुत्र गणेश गजानंद, गौरी पुत्र गणेश

अटक्योड़ा कारज सारो जी, गौरी पुत्र गणेश

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।