नैना हुए बाबरे आजा मोरे सॉवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैना हुए बाबरे आजा मोरे सॉवरे

दरीया कव तक रखोगे मेरे सॉवरे

इक दिन की ये खातिर चहू और निहारू,

कब आओगे सांवरिया दिन-रात पुकारू,

तेरे ही करम से है मुझे बड़ा लाभ रे

इस उजड़े चमन में कब फूल खिलेंगे,

कब महकेगी कलियां कब हम तुम मिलेंगे,

तेरे ही कर्म से ये खिले मेहताब रे

जग देता है ताना तुम भूल ना जाना,

तेरे प्यार का पागल तेरा ही दीवाना,

तुम बिन अधूरा है मेरे मन का ख्वाब रे

जग के त्रिपुरारी हे कृष्ण मुरारी,

सुन अर्ज हमारी मैै हूं दीन भिखारी,

गोहर के खातिर लेकर आजा मीठे भाव रे

प्रेषक नरेंद्र बैरवा(नरसी भगत)

मो नं-८९०५३९७८१३

रमेशदास उदासी गुप

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।