भोले नाथ बन के विश्वनाथ बन के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले नाथ बन के, विश्वनाथ बन के,

चले आना, प्रभु जी चले आना ll

तुम अदभुत, रूप में आना ll

डमरुँ हाथ ले के, गोरा साथ ले के,

चले आना, प्रभु जी चले आना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कभी राम के, रूप में आना ll

धनुष हाथ ले के, सीता साथ ले के,

चले आना, प्रभु जी चले आना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कभी श्याम के, रूप में आना ll

मुरली हाथ ले के, राधा साथ ले के,

चले आना, प्रभु जी चले आना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कभी विप्र, सुदामा बन के ll

तंदुल साथ ले के, लकुटी हाथ ले के,

चले आना, प्रभु जी चले आना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कभी भक्तों को, अपने देने ll

दान हाथ ले के, मान साथ ले के,

चले आना, प्रभु जी चले आना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।