भोले नाथ बन के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले नाथ बन के, विश्वनाथ बन के,

चले आना, प्रभु जी चले आना ll

तुम किसी भी, रूप में आना ll

वैज नाथ बन के, काशी नाथ बन के,

आ जाना, दरस मोहे दे जाना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम हनुमत, रूप में आना ll

रघुवर साथ ले के, गदा हाथ ले के,

चले आना, दरस मोहे दे जाना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

गोरख नाथ, रूप में आना ll

चेले साथ ले के, संगजा मात ले के,

चले आना, दरस मोहे दे जाना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

आ के धरती से, पाप मिटाना ll

गरों को साथ ले के, त्रिशूल हाथ ले के,

आ जाना, दरस मोहे दे जाना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

वीरान के, कष्ट मिटाना ll

करुणा दान दे के, भक्ति ज्ञान दे के,

चले जाना, दरस मोहे दे जाना,

भोले नाथ बन के,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।