तेरी मेहरे नजर ऐसा कर गई असर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी मेहरे नजर ऐसा कर गई असर

जब से मुझपे हुई माँ मजा आ गया

गया मैं दर बदर घुमा इधर उधर जब से दर तेरे आया मजा आ गया,

जब दीवाना हुआ मैं तेरे नाम का

लोग शोह्दाई मुझको समजने लगे

तेरा दीवाना बन तेरा शोह्दाई बन

तेरा करके भजन माँ भजन आ गया,

तेरी मेहरे नजर ऐसा कर गई असर

रेत ही रेत थी जिन्दगी ये मेरी

काम कोई करू काम बनता न था

तूने ऐसा सवारा मुकदर मेरा सारी दुनिया में संदीप है छा गया

तेरी मेहरे नजर ऐसा कर गई असर

चिन्तपुरनी तेरी हाजरी भर के मैं इस जमाने में जब जब याहा भी गया

काम भी बन गया नाम भी बन गया

फेम ऐसा मिला के मजा आ गया

तेरी मेहरे नजर ऐसा कर गई असर

दिल में थी आरजू तेरा दीदार कर

तेरी चोंकी रचाऊ मैं रात बन

सुन के मेरी सदा रुभ रु आ गई

तेरा गुणगान गा के मजा आगेया

तेरी मेहरे नजर ऐसा कर गई असर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।