चिमटा वजदा मेरे सिद्ध जोगी दा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

छन छन चिमटा वजदा मेरे सिद्ध जोगी दा

रूप चन तो सोहना लगदा मेरे सिद्ध जोगी दा

एह इस चिमटे दी माया लोको देव न जानी

बाल न्याने सिद्ध जोगी दी दुनिया बड़ी दीवानी

ना भगता दे दिल विच वसदा मेरे सिद्ध जोगी दा,

छन छन चिमटा वजदा मेरे सिद्ध जोगी दा

बजदा चिमटा विच तलाईया सुंदर गुफा वोच प्यारी,

अज करलो दर्शन गड़ेया चिमटा विच गरूना झाडी

कर दर्शन दिल नही रजदा मेरे सिद्ध जोगी दा,

छन छन चिमटा वजदा मेरे सिद्ध जोगी दा

ओह सिद्ध जोगी दिया सिफ्ता लिखे सनी लुधियाने वाला,

कंठ छवक दा एह सागर दे जोगी धुनें वाला,

मनसा दे नाल झोली है भरदा मेरे सिद्ध जोगी दा,

छन छन चिमटा वजदा मेरे सिद्ध जोगी दा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।