स्वीकार लो यह पूजा हे गौरी मां के लाला

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

स्वीकार लो यह पूजा हे गौरी मां के लाला

स्वीकार लो यह वंदना हे गौरी मां के लाला

करते हैं सबसे पहले हम आवाहन तुम्हारा

आकर की लीजिए आसन दीजे हमें सहारा

पग दीजिए पखारन हे गौरी मां के लाला

स्वीकार लो पूजा हे गौरी मां के लाला

स्वीकार अर्ध कीजे सेवा में आचमन है

स्नान पात्र हाजिर हाजिर नवल वसन है

कीजे जनेऊ धारण हे गौरी मां के लाला

स्वीकार लो यह पूजा हे गौरी मां के लाला

शुभ गंध पुष्प माला चरणों में है समर्पित

और धूप दीप चंदन नैवेद्य भी है अर्पित

यह पान भी है अर्पण हे गौरी मां के लाला

स्वीकार लो यह पूजा हे गौरी मां के लाला।।

हम सारे तेरे बालक मिल आरती उतारे

करते हैं प्रदक्षिणा सब पुष्पांजलि चढ़ाते

हरिये विघ्न हमारे हे गौरी मां के लाला

स्वीकार लो यह पूजा हे गौरी मां के लाला।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।