जन्मो से भटकी हुई नाव को

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जन्मो से भटकी हुई नाव को आज किनारा मिल गया

राम मेरे मुझ पापी को भी तेरा सहारा मिल गया,

जन्मो से भटकी हुई नाव को आज किनारा मिल गया

उल्जा हुआ था मैं माया के जंगल में तुम ने बचाया मुझे,

श्रधा सबुरी का वरदान दे कर जीना सिखाया मुझे,

तेरी किरपा से गंगा के जल में पानी ये खारा मिल गया

जन्मो से भटकी हुई नाव को आज किनारा मिल गया

केहने को तो चल रही थी ये सांसे बे जान थी आत्मा

हां मेरे पापो का जन्मो के शापों का तुमने किया खात्मा

तुमने छुआ तो तुमहरा हुआ तो जीवन दोबरा मिल गया

जन्मो से भटकी हुई नाव को आज किनारा मिल गया

ना जाने कितने जन्म और जलता तृष्णा की इस आग में

काले सवेरे थे लिखे अँधेरे थे श्याद मेरे भाग में

तुम आये ऐसे अंध्रो में जैसे कोई सितारा मिल गया

जन्मो से भटकी हुई नाव को आज किनारा मिल गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।