आनंदा भई मोरे नगरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आनंदा भई मोरे नगरी आज यु आनंदा भई,

मैं यमुना जल भरन गई थी बीच ननदिया झगरी

आज आनंदा भई मोरे नगरी आज यु आनंदा भई,

चाहे न नदियाँ नाचू कुदऊ

पाहिहु न ये काउ दमड़ी,

आज आनंदा भई मोरे नगरी आज यु आनंदा भई,

काहे का बहूजी मोरी जनना जम्यो,

नेग देती पर झगड़ी

आज आनंदा भई मोरे नगरी आज यु आनंदा भई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।