झुंझुनू जावेली रेल गाड़ी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चालो चालो रे बुलावे रानी सती दादी

झुंझुनू जावे ले छुक छुक रेल गाडी,

बाधो आयो मेलो बरसी झुंझुनू मैं वारी,

दादी के मंदिर जाने की करलो सब तयारी

ले लेयो रे चुनर इक लाल साड़ी,

झुंझुनू जावे ले छुक छुक रेल गाडी,

आयो ये सुनार पति से बोल रही है पत्नी

आज जडायो दादी जी इक सोने की नथनी

मंगवालो रे सुनार से पूजा की थाली

झुंझुनू जावे ले छुक छुक रेल गाडी,

झुंझनु जावे लोग लुगाई जावे सुसुर सासू

टाबर बोले मैं भी जा सा लुड़का बे सब आसु

लागे लागे टाबरियां की टिकट आधी

झुंझुनू जावे ले छुक छुक रेल गाडी,

सांचे मन से जाए झुंझुनू दादी ने रिजाओ

दादी जी दीदार गनेरा मन ईशा फल पाओ

बोले बोलो रे राजीव आई अमावश मादी

झुंझुनू जावे ले छुक छुक रेल गाडी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।